Durgamati REVIEW | Durgamati Trailer REVIEW





एक ज़माना था जब बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की पहचान दिमाग घुमाने और दिल को पिघलाने वाली ओरिजिनल स्टोरी के दम पर की जाती थी। थोड़ा ध्यान दीजिएगा। मदर इंडिया से लेकर आनंद आनंद से लेकर अंदाज अपना अपना और में मास्टरपीस फिल्म की पूरी दुनिया को अपनी कहानी से हक्का बक्का करके तालियों का शोर अपने नाम लिख दे दी थी।





लेकिन एक मशहूर कहावत है लालच बुरी बला है और पैसे का लालच बॉलीवुड को पूरी तरह ले डूबा है। आजकल फिल्मों में कहानी तो होती है लेकिन ओरिजिनल हीरो पसंद और साउथ फिल्मों की हंड्रेड परसेंट फोटोकॉपी। अब एक नाम और जोड़ी जिसने सारी हदे पार करके इस बात को क्रेडिट देना ही जरूरी नहीं समझा और लोगों की आंखों में धूल झोंककर साउथ से उठाई कहानी को ओरिजिनल बताकर मतलब चोरी तो चोरी सीनाजोरी वो अलग से डायलॉग चलाइए वो क्या है नाम हिंसा के सख्त खिलाफ है।





लेकिन मेरे शब्दों के बाण आज काफी लोगों को जख्मी करने वाले हैं। हैलो मैं वेलकम टू व्हीलर वियोग दुर्गावती कहानी भूतिया महल के इर्द गिर्द बुनी गई है जिसमें मुझे मोहतरमा यानी लेडी क्रिमिनल को पूछताछ के लिए रात के अंधेरे में कैद किया जाता है जिनका कनेक्शन एक मशहूर पॉलिटिशन यानी नेताजी के साथ जुड़ा हुआ है.





लेकिन मैडम के शरीर में इस महल की रानी दुर्गावती की आत्मा की एंट्री हो जाती है तो पिछले जन्म में अपने साथ नाइंसाफी का बदला लेने वापस धरती पर लौट आई हैं। अब भूत प्रेत आत्मा वगैरह सच में होते हैं या यात्री दुर्गावती के गेटअप के पीछे कोई सोची समझी प्लानिंग छुपी हुई है जिसकी मदद से एक सीक्रेट मिशन को अंजाम दिया जाएगा। बस इसी सवाल में पूरी उनकी जान बसी हुई है।









देखो भागवती जिसको दो साल पहले तेलगू में रिलीज़ किया गया था उसका सस्पेंस क्लाइमेक्स असली साबित हुआ था लेकिन यह बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक महारथी है। यह टाइटल पहले से आपको बता दिया गया है कि दुर्गा एक मोतियानी अफवाह सच्चाई से दूर दूर तक इसका कोई लेना देना नहीं है। सस्पेंस जैसे शब्द की थोड़ी इज्जत तो रख लेते भूमि में कास्ट किया गया है जो बिना किसी शोर के बॉलीवुड की सुपर टैलेंटेड एक्टर्स में से एक है।





लेकिन अनुष्का शेट्टी की जगह भर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन समझ लीजिए जिस इंटेंसिटी और गुस्से के साथ अनुष्का मैडम भागवती के रूप में प्रकट होती हैं वो आपके शरीर पर बम ला देता है वहीं दूसरी तरफ जब दुर्गावती के डायलॉग होती हैं तो उनकी आवाज कंप्यूटर पर खेले जाने वाले वीडियो गेम से नकली महसूस होती है जिसमें इमोशन तो छोड़िए एक भारी भरकम वजन जिसकी जरूरत है वो पूरी तरह गायब इसलिए मेरी कीमत करीब भागवती आपको एकदम हंड्रेड परसेंट हिंदी डबिंग में देखने को मिलेगी।





एक बार जरूर देख लेना उसके बाद इस वीडियो को देखेंगे तो आपको महसूस होगा लक्ष्मी तो याद होगी आपको जो खुद तमिल फिल्म की रीमेक थी उसका जो हाल हुआ था वो किसी से छुपा नहीं है। लेकिन इसके साथ सबक लेने के मूड में नहीं है। सही पकड़े हैं ये जो भागवती से दुर्गावती का पूरा सिलसिला है उसमें आपके पैसे दांव पर लगे हुए हैं। भैयाजी के प्रड्यूसर हैं वे कोई बुरी बात नहीं सब करते हैं आपने भी कर दिया लेकिन उनको क्रेडिट न देना।





ट्रेलर ऑडियो डिस्क्रिप्शन तक में भागवती का जिक्र न होना धोखेबाजी जैसा महसूस होता है। चलो मान लिया और डायरेक्टर एक ही हैं लेकिन आप एमएफ हुसैन की पेंटिंग खरीद के घर में उसके नीचे अपने नाम की पर्ची चिपका के उसको अपना बताकर दोबारा मार्केट में नहीं बेच सकते हैं। सबसे बड़ी बात तो यही है कि ट्रेलर के अंत में लिखा गया है जबकि रियालिटी तो छोड़िए फैन्स की दुनिया में भी ये फोन ओरिजनल जैसे शब्द से लाखों करोड़ों किलोमीटर दूर है।





बाकी अर्शद कपाड़िया ने ब्लैक में काफी ढूंढा। उनसे शिकायत के बाद भी फिल्म देखने के बाद आएगी। देखते हैं वो बिग बी सुतली बम की तरह आंखों में धूल झोंक दें तो बस 11 दिसंबर को प्राइम वाले के साथ महफिल जमाई जाएगी। आप हमारी तरफ से हमने गाना शुरू कर दिया है। आप भी कुछ बढ़िया सी शायरी करिएगा कुछ पसंद आया आपको शिकायत करनी हो तो आपको मिल जाएगी। थोड़ा सा समझते हैं।