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सिंधिया-पायलट के बाद अब क्या कांग्रेस को अलविदा कहेंगे राजीव सातव ?


सिंधिया-पायलट के बाद अब क्या कांग्रेस को अलविदा कहेंगे राजीव सातव ?





नए नेतृत्व को लेकर दुविधा से गुजर रही कांग्रेस में अब विद्रोह बढ़ता जा रहा है पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया तो अब राजस्थान में सचिन पायलट बागी तेवर अपनाए हुए हैं दोपहिया पार्टी के अंदर भी अंतर कलह शुरू हो गई है कांग्रेस नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं.









पार्टी में आत्म निरीक्षण की सलाह देने वाले कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने अब उन्हें समझाने वाले नेताओं पर शेरो शायरी के जरिए हमला किया है राजीव साथ अपने ट्वीट कर अपने सब्र का इम्तिहान की बात कही है राजीव सातव ने लिखा मत पूछो मेरे सब्र की इंतहा कहां तक है तू सितम कर ले तेरी ताकत जहां तक है वफ़ा की उम्मीद जिन्हें होगी उन्हें होगी हमें तो देखना है तू डार्लिंग कहां तक है.





दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने पार्टी में निरीक्षण की सलाह देने वाली राजेश यादव पर निशाना साधा था मनीष तिवारी ने ट्वीट कर लिखा था बीजेपी 2004 से 2014 तक 10 साल सत्ता से बाहर रहे लेकिन उन्होंने उस समय की हालत के लिए कभी अटल बिहारी वाजपेई या उनकी सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया उन्होंने कहा कांग्रेस में दुर्भाग्य से कुछ दिग्भ्रमित लोग राजग और बीजेपी से लड़ने के बजाय डॉ मनमोहन सिंह नीत संप्रग सरकार पर छींटाकशी कर रही है.





जब एकता की जरूरत है वह विभाजन कर रहे हैं बहस और आगे बढ़ गई जब तिवारी के जवाब में कांग्रेस के पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा ने कहा बहुत सही कहा मनीष 2014 में पद छोड़ते समय डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था.





इतिहास मेरे प्रति उदार रहेगा देवड़ा ने ट्वीट में कहा क्या कभी उन्होंने कल्पना भी की होगी कि उनकी ही पार्टी के कुछ लोग देश के प्रति उनकी सालों की सेवा को खारिज कर देंगे और उनकी विरासत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे वह भी उनकी मौजूदगी में





बता दे कि राजीव साथ अपनी इस बहस को समय जन्म दिया जब उन्होंने पूर्व मंत्रियों कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम से इतनी पुरानी बड़ी पार्टी के कमजोर होने पर आत्म चिंतन को कहा उन्होंने कहा था आप सभी कह रहे हैं कि हमें आत्मनिरीक्षण की जरूरत है इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए साल 2009 में 200 से ज्यादा थे लेकिन 44 पर कैसे आए आप सभी उस वक्त मंत्री थे उन्होंने कहा यह भी रखा जाना चाहिए कि आप कहां असफल रहे जिसके बाद यह बहस लगातार बढ़ती जा रही है.


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