Yaara movie review : यारा मूवी फुल रिव्यू इन हिंदी।
2012 में नेशनल अवार्ड जीतने वाली पान सिंह तोमर, साहब बीवी और गैंगस्टर सीरीज की पहली दो पहले फिल्मों को छोड़ दे तो कभी भी निर्देशक तिग्मांशु धूमिल की फिल्में सफल नहीं हो पाई!

इससे पहले उनके द्वारा जो भी फिल्में बनाई गई वह दर्शकों को कुछ खास पसंद नहीं आई। ना ही रास आई नहीं ज्यादा लोगों ने उनको देखना पसंद किया।
इसी तरह उनकी काफी सारी फिल्मों को दर्शकों ने ठुकराया इस तरह आप इस यारा फिल्म को भी नाकाम मूवी में जोड़ सकते हैं।
2011 में आई निर्देशक ओलिवर मार्शल की फ्रेंच क्लास लिए। इनमें चार गैंगेस्टर दोस्तों की कहानी धूलिया ने इसका हिंदी करण बॉलीवुड में किया है।
अगर बात की जाए तिग्मांशु की तो यह अपनी फिल्मों में दोस्ती का रंग नहीं जमा पाते। इसलिए इनकी फिल्मों को दर्शक कम देखना पसंद करते हैं। इसलिए इनकी मूवीज है। वह फ्लॉप हो जाती है.
क्योंकि इनकी फिल्मों में ज्यादातर दर्शकों को ना तो कुछ मजा मिलता है ना ही इंटरटेन मिल जाए तो दर्शक उनकी फिल्मों को है। बीच में ही
छोड़ देने का मन बना लेते है.
अगर हम बात करें यारा फिल्म की तो यारा फिल्म में 4 बच्चे अपराध की दुनिया में लुका छुपी करते जवानी की दहलीज पर कदम रखते हैं या चौकड़ी मिलकर अपराध करती है और हर जगह सफल होती है।
कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो इस फिल्म में आपको नक्सलवाद देखने को मिल सकता है और कुछ पॉलिटिक्स भी मगर इससे बात नहीं बनती। तस्करी कच्ची शराब और हथियारों की सप्लाई करने वाले चारों पर सेवर अधिकारी एक घटना में पुलिस के हत्थे चढ़ते हैं। पुलिस उन्हें खूब टॉर्चर करती है। अदालत ने उन्हें अलग-अलग सजा होती है। अलग-अलग जेलों में रखा जाता है।
अगर फिल्में कमियों की बात करें तो दर्जनों संवेदनशील विषय हैं, जिन्हें कहे जाने की जरूरत है। फ्रेंच चोरों वाली यारा की कहानी ना पूरी विदेशी रह जाती है। ना ही पूरी देसी बन पाती है। बीते कुछ वर्षों में बुलेट राजा राग, देश साहब, बीवी और गैंगस्टर 3 पर मिलन टॉकीज जैसी फ्लॉप फिल्में देने वाले तिग्मांशु को कहानी के चयन के बारे में लिखकर सोचना चाहिए। बड़े सितारे उनके पास नहीं है.

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